Saint Rishi

Sanskrit Sukti on being prudent

ऋणशेषं चाग्निशेषं शत्रुशेषं तथैव च व्याधिशेषं च नि: शेषं कृत्वा प्राज्ञो न सीदति अर्थ ऋण (कर्ज़), अग्नि , शत्रु, और व्याधि (बीमारी) को शेष न…

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Sanskrit Sukti on self-respect

मनस्विनो न मन्यन्ते परत: प्राप्य जीवनम् बलिभुग्भ्यो न काकेभ्य: स्पृहयन्ति हि कोकिला: मनस्वी लोग नहीं मानते, किसी और से पाया हुआ जीवन बलि पर जीने…

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